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कुलार्णव • अध्याय 10 • श्लोक 65
यदर्घनाच्चतुःषष्टियोगिनीगणसंस्तुतः । पुनरावृत्तिरहितो निवसेत्तव सन्निधौ ॥ समस्तदेवताप्रीतिकारणं परमेश्वरि । अस्मात् परतरा पूजा नास्ति सत्यं न संशयः ॥
इस पूजन से वह ६४ योगिनियों द्वारा संस्तुत होकर पुनर्जन्म से छूटकर आपके पास रहता है। हे परमेश्वरि! इससे सभी देवता प्रसन्न होते हैं। अतः इससे श्रेष्ठ अन्य पूजा नहीं है, यह निस्सन्देह सत्य है।
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