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कुलार्णव • अध्याय 10 • श्लोक 64
एवं यः कुरुते देवि सकृदष्टाष्टकार्बनम् ॥ ब्रह्मविष्णुमहेशादिदेवताभिः स पूज्यते । किं पुनर्मानवाद्यैश्च साक्षात् शिव इवापरः ॥
इस प्रकार जो एक बार अष्टाष्टक की पूजा करता है, वह ब्रह्मा, विष्णु, महेशादि देवताओं द्वारा पूजित होता है। फिर मनुष्यों की क्या बात। बह साक्षात् शिव ही होता है।
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