पूर्वोक्त विधान से यथाशक्ति उनकी पूजा करे। अपने अभीष्ट कार्य को सिद्ध करने के लिये क्रम का लोप न करे। गन्ध, पुष्पाक्षत, मत्स्य, मांस, मद्य, भक्ष्य, भोज्य आदि छः रसों से युक्त पदार्थों आदि से मिधुनों को हे देवि! अति भक्ति के साथ अच्छी तरह सन्तुष्ट करे। हे अम्बिके! प्रौढान्त उल्लास तक श्री चक्रार्चन करे।
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