मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 10 • श्लोक 63
पूर्वोक्तेन विधानेन यथाविभवविस्तरम् । क्रमलोपं न कुर्वीत स्वेष्टकार्यार्थसिद्धये ॥ गन्यपुष्पाक्षताद्यैश्च मत्स्यमांसासवादिभिः । भक्ष्यभोज्यादिभिर्नानापदार्थैः षड्रसान्वितैः । सम्यक् सन्तोषयेद्देवि मिथुनान्यतिभक्तितः ॥ प्रौढान्तोल्लासपर्यन्तं कुर्यात् श्रीचक्रमम्बिके ।
पूर्वोक्त विधान से यथाशक्ति उनकी पूजा करे। अपने अभीष्ट कार्य को सिद्ध करने के लिये क्रम का लोप न करे। गन्ध, पुष्पाक्षत, मत्स्य, मांस, मद्य, भक्ष्य, भोज्य आदि छः रसों से युक्त पदार्थों आदि से मिधुनों को हे देवि! अति भक्ति के साथ अच्छी तरह सन्तुष्ट करे। हे अम्बिके! प्रौढान्त उल्लास तक श्री चक्रार्चन करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें