मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 10 • श्लोक 61
मूलाष्टकन्तु ब्रह्माद्याश्चासिताङ्गादिभैरवाः । मङ्गलाद्यैश्च मिथुनैरष्टभिः शब्दिताः प्रिये ॥
ब्राह्मी आदि आठ मातृकाएँ और असिताङ्ग आदि आठ भैरव अपने मंगलादि मिथुनों सहित मूलाष्टक हैं। विमर्श - ब्राह्मी, नारायणी, माहेश्वरी, चामुण्डा, कौमारी, अपराजिता, बाराही और नारसिंही - ये आठ कुलाष्टक है। बृहत्तन्त्रसार, पृ० ५३१ दसर्वां Edition । वामकेश्वर तन्त्रान्तर्गत नित्याषोडशिकार्णव (१. १६९-१७१) में कुछ अन्तर है - ब्राह्मी, माहेश्वरी, कौमारी, वैष्णवी, वाराही, ऐन्द्री, चामुण्डा और महालक्ष्मी। अष्टाङ्ग, रुरु, चण्ड, क्रोध, उन्मत्त भैरव, कपाली, भीषण और संहार - ये आठ भैरव है - पुरश्चर्यार्णव ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें