ब्राह्मी आदि आठ मातृकाएँ और असिताङ्ग आदि आठ भैरव अपने मंगलादि मिथुनों सहित मूलाष्टक हैं।
(विमर्श— ब्राह्मी, नारायणी, माहेश्वरी, चामुण्डा, कौमारी, अपराजिता, बाराही और नारसिंही — ये आठ कुलाष्टक है। बृहत्तन्त्रसार, पृ० ५३१ दसर्वां Edition । वामकेश्वर तन्त्रान्तर्गत नित्याषोडशिकार्णव (१. १६९-१७१) में कुछ अन्तर है — ब्राह्मी, माहेश्वरी, कौमारी, वैष्णवी, वाराही, ऐन्द्री, चामुण्डा और महालक्ष्मी। अष्टाङ्ग, रुरु, चण्ड, क्रोध, उन्मत्त भैरव, कपाली, भीषण और संहार — ये आठ भैरव है — पुरश्चर्यार्णव।)
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