दीपक की बत्ती अनामिका के समान मोटी हों उत्तर की ओर मुख कर साधक कलश के सामने बैठे एवं उक्त दीपक की ज्योति में आवरण सहित देवी का ध्यानकर विधिवत् उसकी पूजा करे। फिर यौवनोल्लास से युक्त होकर दीपस्य देवता का स्मरण करते हुए एकाग्र मन से १००८ बार जप करे।
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