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कुलार्णव • अध्याय 10 • श्लोक 55
शुक्लपक्षेऽर्चनं यद्वत्तद्वत् पक्षे सितेतरे । यः करोति विधानेन सर्वान् कामान् समश्नुते ॥ इह भुक्त्वाऽखिलान् भोगान् देववत् प्रियदर्शनः । योगिनीवीरमेलनं लभते नात्र संशयः ॥
शुक्लपक्ष के समान ही कृष्णपक्ष का पूजन भी वैसा ही फलप्रद है। जो विधिपूर्वक इसे करता है, वह सभी कामनाओं को प्राप्त करता है और इस संसार में सभी सुखों का उपभोग कर देवता के समान दर्शनीय होता है तथा योगिनी वीर के सम्मिलन का आनन्द प्राप्त करता है, इसमें सन्देह नहीं।
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