फिर पूर्वोक्त सूर्यपूजा में कही गई विधि से सभी द्रव्यों से तथा स्वयं यौवन के उल्लास से युक्त होकर चन्द्र में स्थित देवता का ध्यान करते हुये चन्द्रमा के अस्त होने के समय तक एकाग्रचित्त से मन्त्रजप करे। इस प्रकार प्रतिदिन माघ शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी पर्यन्त पूजा करनी चाहिए।
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