हे प्रिये! इसी क्रम से मध्याह्न या सायाह्न में भी (सूर्य) पूजा की जा सकती है। यह तीनों सन्ध्याओं की पूजा भी वही फल देती है और साधक योगिनियों का प्रिय हो जाता है।
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