मद्यं मांसञ्च मत्स्यश्च मुद्रा मैथुनमेव च ।
मकारपञ्चकं देवि देवताप्रीतिकारकम् ॥
मद्य, मांस, मत्स्य, मुद्रा और मैथुन - ये पञ्चमकार देवता को प्रसन्न करते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।