एवं यो मासमात्रन्तु कुर्यात् सूर्योदयार्चनम् ।
देवता तस्य सन्तुष्टा ददाति फलमीप्सितम् ॥
इस प्रकार एक मास तक जो साधक सूर्योदय का अर्चन करता है, उससे देवता सन्तुष्ट होकर उसे अभीष्ट फल प्रदान करते हैं।
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