एवं शुक्लप्रतिपदं समारध्य दिने दिने । कुर्याज्जपार्चनं कृष्णचतुईश्यन्तमम्बिके ॥
अमावस्यादिने देवि पूजयेच्छक्तिकौलिकान् । त्रिपञ्चसप्त नव वा वित्तलोभविवर्जितः ॥
हे अम्बिके! इस प्रकार शुक्ल प्रतिपदा के शुभ दिन से प्रारम्भ कर कृष्ण चतुर्दशी के दिन तक जप पूजा करे और हे देवि! अमावास्या के दिन कृपणता छोड़कर यथाशक्ति तीन, पाँच, सात या नौ शक्तियों तथा कौलिकों का पूजन करे।
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