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कुलार्णव • अध्याय 10 • श्लोक 47
ध्यायंस्तन्मण्डलं देवीमष्टोत्तरसहस्रकम् । जप्त्वा समर्प्य तत्पूजां देवताश्च समुद्धरेत् ॥
देवी के उक्त मण्डल का ध्यान करते हुये १०८ बार जप करे। फिर जप समर्पित कर पूजा और देवता का विसर्जन करे।
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