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कुलार्णव • अध्याय 10 • श्लोक 45
किञ्चिदभ्युदिते सूर्ये मण्डले स्वेष्टदेवताम् ॥ ध्यात्वा सावरणां सम्यक् पूजयेद्विधिना प्रिये । षोडशैरुपचारैस्तु चक्रपूजापुरःसरम् ॥
हे प्रिये! सूर्यमण्डल के कुछ उदित होने पर इष्टदेवता का आवरणों के सहित ध्यान कर षोडशोपचारों से चक्रपूजायुक्त पूजन करे।
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