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कुलार्णव • अध्याय 10 • श्लोक 44
अथ वैशाखमासस्य शुक्लप्रतिपदीश्वरि । ब्राह्मे मुहूर्ते उत्थाय स्नानं सन्ध्यामुपास्य च ॥ मनोज्ञे रहसि स्थाने पूर्वाशाभिमुखस्थितः । आत्मानं गन्धपुष्पाद्यैरलङ्कृत्य विधानवित् ॥ कृत्वा पुरोदितन्यासान् देवताभावमास्थितः ।
हे ईश्वरि! वैशाख मास की शुक्ल प्रतिपदा के दिन ब्राह्म मुहूर्त में उठकर स्नान एवं सन्ध्या से निवृत्त हो मनोरम एकान्त स्थान में पूर्व की ओर मुख करके बैठे। फिर विधिपूर्वक अपने आपको गन्ध पुष्पादि से अलंकृत कर पूर्वोक्त न्यासों को कर देवभाव को प्राप्त करे।
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