हे ईश्वरि! वैशाख मास की शुक्ल प्रतिपदा के दिन ब्राह्म मुहूर्त में उठकर स्नान एवं सन्ध्या से निवृत्त हो मनोरम एकान्त स्थान में पूर्व की ओर मुख करके बैठे। फिर विधिपूर्वक अपने आपको गन्ध पुष्पादि से अलंकृत कर पूर्वोक्त न्यासों को कर देवभाव को प्राप्त करे।
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