प्रत्येक नाम के आदि में तीन 'तार' (ॐ) और अन्त में 'नमः' लगाकर अर्थात् 'ॐ ॐ ॐ गौरीशिवाभ्यां नमः' इत्यादि मन्त्रों से विधानवित् साधक गन्ध पुष्पादि से पूजा कर मद्यादि से सन्तुष्ट करे।
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