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कुलार्णव • अध्याय 10 • श्लोक 40
गौरीशिवौ रमाविष्णू वाणीसरसिजासनौ । शचीन्द्रौ रोहिणीचन्द्रौ स्वाहाग्नी च प्रभारवी ॥ भद्रकालीवीरभद्रौ भैरवीभैरवावपि । मिथुनानि नवायर्च्य पूर्वोक्तेनैव वर्त्मना ॥
१. गौरी-शिव, २. रमा-विष्णु, ३. वाणी-ब्रह्मा, ४. शची-इन्द्र, ५. रोहणी-चन्द्र, ६. स्वाहा-अग्नि, ७. प्रभा-रवि, ८. काली-वीरभद्र और ९. भैरवी-भैरव - इन नौ मिथुनों (युगलों) का पूजन पूर्वोक्त विधि से करे।
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