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कुलार्णव • अध्याय 10 • श्लोक 4
विहितैर्मादिभिर्द्रव्यैर्मासादूर्ध्वं समर्चनम् । पशोर्भूयः प्रवेशेच्छा यदि स्याद्दीक्षयेत् पुनः ॥
मास भर बाद विहित मादि (पञ्चमकार) द्रव्यों से पूजन होने पर यदि 'पशु' की उसमें सम्मिलित होने की इच्छा हो, तो उसकी पुनः दीक्षा करे।
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