विहितैर्मादिभिर्द्रव्यैर्मासादूर्ध्वं समर्चनम् ।
पशोर्भूयः प्रवेशेच्छा यदि स्याद्दीक्षयेत् पुनः ॥
मास भर बाद विहित मादि (पञ्चमकार) द्रव्यों से पूजन होने पर यदि 'पशु' की उसमें सम्मिलित होने की इच्छा हो, तो उसकी पुनः दीक्षा करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।