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कुलार्णव • अध्याय 10 • श्लोक 36
त्रिपञ्चसप्तनवसु भृगुवारेषु यः प्रिये । पूजयेद्विधिनाऽनेन तस्य पुण्यं न गण्यते ॥
हे प्रिये! तीन, पाँच, सात या नौ शुक्रवारों में जो इस विधि से पूजा करता है, उसके पुण्य की गणना नहीं की जा सकती।
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