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कुलार्णव • अध्याय 10 • श्लोक 34
प्रौढान्तोल्लाससहितां तां प्रपश्यन् जपेन्मनुम् । यौवनोल्लाससहितः स्वयं तद्ध्यानतत्परः ॥
फिर 'प्रौढान्त' उल्लास से युक्त भक्तिभाव से उन्हें देखता हुआ मन्त्र का जप करे। स्वयं यौवनोल्लास से युक्त रहे और देवी का ध्यान करता रहे।
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