फिर उसमें देवता का आवाहन कर न्यासक्रम से क्रमार्चन कर धूप, कुलदीपकों को दिखाकर हे देवि! उसे देवता समझते हुये छः रसों से युक्त मांसादि भक्ष्य भोज्यादि पदार्थों से भक्तिपूर्वक सन्तुष्ट करे।
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