मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 10 • श्लोक 30
प्रौढान्तोल्लाससंयुक्ताः सन्तुष्टा यदि ताः प्रिये । साधकस्तुष्टिमासाद्य निवसेत्तव सन्निधौ ॥
हे प्रिये! 'प्रौढान्त' उल्लास से युक्त होकर यदि वे सन्तुष्ट होते हैं, तो साधक उन देवों को प्रसन्न करने में सफल होता है और आपके समीप निवास करता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें