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कुलार्णव • अध्याय 10 • श्लोक 23
नवम्यामेकवर्षादि-नववर्षान्तकन्यकाः बाला शुद्धा च ललिता मालिनी च वसुन्धरा । सरस्वती रमा गौरी दुर्गा च नव कीर्त्तिताः ॥ त्रिताराद्यैर्नमोऽन्तैश्च देवतापदपश्चिमैः । नामभिश्च चतुर्थ्यन्तैः पूजयेत्ताः पृथक् पृथक् ॥
इसी क्रम से नवमी के दिन एक वर्ष से नौ वर्ष तक की कन्याओं की पूजा करे । ये नौ कन्याएँ क्रमशः १. बाला, २. शुद्धा, ३. ललिता, ४. मालिनी, ५. वसुन्धरा, ६. सरस्वती, ७. रमा, ८. गौरी और ९. दुर्गा कही गई हैं। आदि में तीन प्रणव (ॐ ॐ ॐ), अन्त में 'नमः' पद, 'देवता' एवं 'कन्या' के चतुर्थ्यन्त नाम लगाकर अलग अलग उन कन्याओं का पूजन करना चाहिए। विमर्श - इनके पूजन के मन्त्र इस प्रकार हैं - १. ॐ ॐ ॐ बालायै देवतायै नमः, २. ॐ ॐ ॐ शुद्धायै देवतायै नमः, ३. ॐ ॐ ॐ ललितायै देवतायै नमः, ४. ॐ ॐ ॐ मालिन्यै देवतायै नमः, ५. ॐ ॐ ॐ वसुन्धरायै देवतायै नमः, ६. ॐ ॐ ॐ सरस्वत्यै देवतायै नमः, ७. ॐ ॐ ॐ रमायै देवतायै नमः, ८. ॐ ॐ ॐ गौर्य देवतायै नमः, ९. ॐ ॐ ॐ दुर्गायै देवतायै नमः। इन मन्त्रों से इनकी अलग अलग पूजा करे।
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