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कुलार्णव • अध्याय 10 • श्लोक 21
सशक्तिकः स्वयं देवि प्रौढान्तोल्लाससंयुतः । यथाशक्ति जपेदेकोत्तरवृद्ध्याऽथवा मनुम् ॥ बालामलङ्कृतां पश्यन् चिन्तयेत् स्वेष्टदेवताम् । ततस्तां देवताबुद्ध्या नमस्कृत्य विसर्जयेत् ॥
स्वयं शक्ति सहित प्रौढ़ोल्लास पर्यन्त आनन्दयुक्त होकर, हे देवि! उस सुशोभिता बाला को देखता हुआ अपने इष्ट देवता का स्मरण करे और यमाशक्ति एक से अधिक मन्त्र का जप करे। तब उसे देवता बुद्धि से नमस्कार कर विसर्जित करे।
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