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कुलार्णव • अध्याय 10 • श्लोक 20
पूजासदनमानयेत् । अध्यङ्गस्नानशुद्धान्तां देवतासन्निधौ बालामुपवेश्य समर्चयेत् ॥ गन्धपुष्पादिभिधूपैर्दीपैश्च कुलदीपकैः । भोग्यभोज्यान्नपानाद्यैः क्षीराज्यमधुमांसकैः । कदलीनारिकेलादिफलैस्तां परितोषयेत् ॥
तैल, स्नानादि से शुद्ध उस बाला को पूजागृह में लाकर देवता के समीप बैठाकर गन्ध, पुष्प, धूप, दीप एवं कुलदीपकों से उसकी पूजा करे । फिर दूध, घी, मधु, मांसादि भोज्य अन्न पानादि और केला, नारियल आदि फलों से उसे सन्तुष्ट करे।
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