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कुलार्णव • अध्याय 10 • श्लोक 15
रोगेष्वापत्सु दोषेषु दुः सङ्गे दुर्निमित्तके । पूजयेद् योगिनीवृन्दं देवि तद्दोषशान्तये ॥
रोगों में, आपत्तियों में, कठिन परिस्थितियों में तथा दुष्ट के संग होने पर उनके दोषों को शान्ति के लिए योगिनीसमूह का पूजन करे।
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