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कुलार्णव • अध्याय 10 • श्लोक 103
इति ते कथितं किञ्चिद्विशेषदिवसार्चनम् । समासेन कुलेशानि किम्भूयः श्रोतुमिच्छसि ॥
हे प्रिये! इस प्रकार मैंने आपसे विषय में संक्षेप से कहा है। अब हे कुलेशानि! आप और क्या सुनना चाहती है?
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