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कुलार्णव • अध्याय 10 • श्लोक 102
हाकिनी ऋक्षवदना नीलनीरदसन्निभा । कपालशूलहस्ता च खेटकैरुपशोभिता । एकद्वित्रिचतुः पञ्चषण्मुखा सरभाभया ॥
ऋक्ष के मुख वाली, नीले बादल के सदृश विग्रह बाल्ली, हाथों में कपाल एवं शूल (त्रिशूल) से युक्त और तलवार (एवं अभय मुद्रा) से सुशोभित हाकिनी का ध्यान करना चाहिए। इस प्रकार एक, दो, तीन, चार, पाँच एवं छः मुखों वाली तथा 'शीघ्र' अभय प्रदान करने वाली हाकिनी देवी का ध्यान करना चाहिए।
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