धर्मज्ञानसुपुष्यस्य स्वर्गलोक फलस्य च ।
तापत्रयार्त्तिसन्तप्तश्छायां मोक्षतरोः श्रयेत् ॥
तापत्रय के कष्ट से पीड़ित व्यक्ति स्वधर्मज्ञानरूपी पुष्प और स्वकुलोक्त (अर्थात् अपने कुल धर्म में जो बातें प्रचलित हैं ऐसे) स्वर्ग के फल वाले मोक्षरूप कल्पवृक्ष की छाया का आश्रय ग्रहण करे।
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