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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 98
तस्मात् सर्वप्रयत्नेन सर्वावस्थासु सर्वदा । तत्त्वनिष्ठो भवेद्देवि यदीच्छेन्मोक्षमात्मनः ॥
अतएव, हे देवि! यदि आत्ममुक्ति की इच्छा हो तो सभी प्रयत्नों से सभी अवस्थाओं में सदैव तत्त्वनिष्ठ रहे।
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