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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 94
द्वे पदे बन्धमोक्षाय ममेति निर्ममेति च । यमेति बाध्यते जन्तुर्न ममेति विमुच्यते ॥
यह मेरा है, यह मेरा नहीं है यही दो पद क्रमशः बन्धन और मोक्ष के कारण है। मेरा है - यही जीव को बांधता है। मेरा नहीं है - यह जीव को मुक्ति दिलाता है।
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