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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 92
आगमोत्थं विवेकोत्थं द्विधा ज्ञानं प्रचक्षते । शब्दब्रह्मागममयं परं ब्रह्म विवेकजम् ॥
ज्ञान दो प्रकार का बताया गया है - एक तो आगम से प्राप्त होता है और दूसरा विवेक से। आगम से प्राप्त ज्ञान शब्द ब्रह्मपरक होता है और विवेक से प्राप्त ज्ञान परब्रह्म का निदर्शक होता है।
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