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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 91
अद्वैतन्तु शिवेनोक्तं क्रियायासविवर्जितम् । गुरुवक्त्रेण लभ्येत नान्यथागमकोटिभिः ॥
अद्वैतवाद शिव जी ने कहा है जिसमें किसी प्रकार के कर्म का आयास नहीं है। वह गुरुमुख से ही प्राप्त होता है, अन्य करोडों आगमों से नहीं प्राप्त होता।
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