ततश्चाप्युत्तम जन्म लब्ध्वा चेद्धियसौष्ठवम् ।
न वेत्यात्महितं यस्तु स भवेत् आत्मधातकः ॥
उत्तम जन्म और सुन्दर इन्द्रियों को पाकर भी जो अपने हित को नहीं समञ्जता वह आत्महत्या करने वाला आत्मघाती है।
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