न वेदाध्ययनान्मुक्तिर्न शास्त्रपठनादपि ।
ज्ञानादेव हि मुक्तिः स्यान्नान्यथा वीरवन्दिते ॥
न तो वेदों के अध्ययन से मुक्ति मिलती हैं और न शास्त्रों के पढने से ही। ज्ञान ही से मुक्ति मिलती है। हे वीरवन्दिते! अन्य से नहीं।
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