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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 85
वेदाद्यनेकशास्त्राणि स्वल्पायुर्विघ्नकोटयः । तस्मात् सारं विजानीयात् क्षीरं हंस इवाम्भसः ॥
वेद आदि अनेक शास्त्र हैं और आयु स्वल्प है और असंख्य विघ्न हैं। अतः सार तत्व को जानना चाहिए जैसे हंस पानी में दूध को पहचान लेता है।
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