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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 84
इदं ज्ञानमिदं ज्ञेयं सर्वतः श्रोतुमिच्छति । देवि वर्षसहस्त्रायुः शास्त्रान्तं नैव गच्छति ॥
"यह ज्ञान है, यह ज्ञेय है" - इस प्रकार सर्वत्र सुनना चाहते हैं। इस तरह हे देवि! वे सहस्र वर्षों की आयु में भी शास्त्र का सार नहीं समझ पाते।
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