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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 82
प्रज्ञाहीनस्य पठनम् अन्धस्यादर्शदर्शनम् । देवि प्रज्ञावतः शास्त्रं तत्त्वज्ञानस्य कारणम् ॥
प्रज्ञा से हीन व्यक्ति का पढ़ना उसी प्रकार है, जैसे अन्धे को दर्पण में दिखाना। हे देवि! प्रज्ञावान् को ही शास्त्र से ज्ञान मिलता है।
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