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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 8
सोपानभूतं मोक्षस्य मानुष्यं प्राप्य दुलभम्‌ । यस्तारयति नात्मान तस्मात्‌ पापतरोऽत्न कः ॥
मोक्ष प्राप्ति के लिए सोपान (सीढ़ी) के समान दुर्लभ मनुष्य शरीर को प्राप्त कर जो अपनी आत्मा को मुक्त नहीं करता, उससे बड़ा पापी कौन है?
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