जैसे शिर पुष्प का वहन तो करता है किन्तु गन्ध तो नासिका ही प्राप्त करती है, वैसे ही वेद एवं शास्त्रों को लोग पढ़ते हैं किन्तु उनके भाव को समझने वाले दुर्लभ हैं।
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