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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 75
इदं ज्ञानमिदं ज्ञेयमिति चिन्तासमाकुलाः । पठन्त्यहर्निशं देवि परतत्त्वपराङ्‌मुखः ॥
हे देवि! परतत्त्व से दूर रहकर लोग रात-दिन "यह ज्ञान है यह ज्ञेय है" यही पढ़ते हैं और इसी बात के विचार में व्याकुल रहते हैं।
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