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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 74
वेदागमपुराणज्ञः परमार्थं न वेत्ति यः । विडम्बकस्य तस्यापि तत् सर्वं काकभाषितम् ॥
वेद, आगम और पुराणों को जानने वाला जो व्यक्ति परमार्थ को नहीं जानता, उस दाम्भिक का सारा कथन कौए के काँव-काँव के समान निरर्थक होता है।
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