वेदशास्त्रार्णवे घोरे ताड्यमाना इतस्ततः ।
कालोर्मिग्राहप्रस्ताश्च तिष्ठन्ति हि कुतार्किकाः ॥
इस वेद शास्त्र रूपी घोर सागर में इधर उधर टक्कर खाते हुए काल रूपी ग्रह से ग्रस्त कुतार्किक निवास करते हैं। डूबते उतराते हुये वे लोग कुतर्क रूपी भयंकर लहरों और मगर घड़ियालों के मध्य फँसे रहते हैं ।
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