षड्दर्शनमहाकूपे पतिताः पशवः प्रिये ।
परमार्थं न जानन्ति पशुपाशानियन्त्रिताः ॥
हे प्रिये! षड्दर्शन रूपी गहरे कुएँ में पड़े हुए लोग पशु-पाशों में बँधे हुये वे परमार्थ को नहीं जानते।
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