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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 70
शीतवातातपसहा भक्ष्याभक्ष्यसमाः प्रिये । तिष्ठन्ति शूकराद्याश्च योगिनस्ते भवन्ति किम् ॥
हे प्रिये! सूअर आदि पशु जाड़े, गर्मी, धूप को सहन करते हैं, भक्ष्य-अभक्ष्य जिनके लिए समान है, तो क्या वे योगी बन जाते हैं?
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