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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 7
अत्र॒ जनमसहस््रेषु सहस्रैरपि पार्वति । कदाचिल्लभते जन्तुमनुष्यं पुण्यसञ्चयात्‌ ।।
हे पार्वती! सैकड़ों एवं हजारो योनियों में अच्छे कर्मो के फलस्वरूप कभी वे मानव होकर जब ज्ञानी होते हैं, तब मोक्ष को प्राप्त करते हैं।
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