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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 65
मृद्भस्मम्रक्षणाद् देवि मुक्ताः स्युर्यदि मानवाः । मृद्भस्मवासिनो ग्राम्याः किं ते मुक्ता भवन्ति हि ॥
हे देवि! मिट्टी और भस्म लगाने से यदि मुक्ति मिलती है, तो क्या गाँव की मिट्टी में तथा राख में रहने वाले आमजन क्या मुक्त होते हैं?
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