इस प्रकार संसार के सुख में आसक्त, किन्तु "मैं ब्रह्म हूँ" यह कहने वाले व्यक्ति कर्म और ब्रह्म दोनों से भ्रष्ट होते हैं। अतः अन्त्यज के समान उनका सर्वदा त्याग करना चाहिए।
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