मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 60
नाममात्रेण सन्तुष्टाः कर्मकाण्डरता नराः । मन्त्रोच्चारणहोमाद्यैर्भामिताः क्रतुविस्तरैः ॥ एकभक्तोपवासाद्यैर्नियमैः कायशोषणैः । मूढ़ाः परोक्षमिच्छन्ति तवं मायाविमोहिताः ॥
कर्मकाण्ड में निरत विशाल यज्ञों में मन्त्रोच्चारण द्वारा किये गये होम से नाम मात्र संतुष्ट, एक बार भोजन अथवा उपवास आदि नियमों से शरीर को सुखाकर आपकी माया से विमोहित हुए मूर्ख जन परोक्ष पब्रह्म को पाने की इच्छा करते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें