कर्मकाण्ड में निरत विशाल यज्ञों में मन्त्रोच्चारण द्वारा किये गये होम से नाम मात्र संतुष्ट, एक बार भोजन अथवा उपवास आदि नियमों से शरीर को सुखाकर आपकी माया से विमोहित हुए मूर्ख जन परोक्ष पब्रह्म को पाने की इच्छा करते हैं।
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