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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 57
स्वदेहधर्मदारादिनिरताः सर्वजन्तवः । जायन्ते च प्रियन्ते च हा हन्ताज्ञानमोहिताः ॥
हाय! यह अत्यन्त खेद की बात है कि अपने शरीर, धर्म और स्त्री आदि में आसक्त रहने वाले सभी जीव अज्ञान से मोहित होकर जन्म लेते रहते हैं और मरते रहते हैं।
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