स्वदेहधर्मदारादिनिरताः सर्वजन्तवः ।
जायन्ते च प्रियन्ते च हा हन्ताज्ञानमोहिताः ॥
हाय! यह अत्यन्त खेद की बात है कि अपने शरीर, धर्म और स्त्री आदि में आसक्त रहने वाले सभी जीव अज्ञान से मोहित होकर जन्म लेते रहते हैं और मरते रहते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।