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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 55
निद्रादिमैथुनाहाराः सर्वेषां प्राणिनां समाः । ज्ञानवान् मानवः प्रोक्तो ज्ञानहीनः पशुः प्रिये ॥
निद्रा, मैथुन और भोजन सभी प्राणियों में समान रूप से होते हैं। किन्तु जो ज्ञानी है, वही "मानव" कहा जाता है। हे प्रिये! ज्ञान से हीन मानव "पशु" है।
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